वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट: भारत में रोज़गार की कमी नहीं,स्किल आधारित शिक्षा की जरूरत
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट: वर्ल्ड बैंक की नई रिपोर्ट 'जॉब्स एट योर डोरस्टेप' में बताया गया है कि भारत में रोज़गार के अवसरों की कोई कमी नहीं है। समस्या यह है कि छात्रों को इन अवसरों के लिए आवश्यक कौशल और शिक्षा नहीं मिल पाती। यह रिपोर्ट शुक्रवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जारी की।
धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत छठी कक्षा से ही छात्रों को कोई न कोई हुनर सिखाने पर जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि के तहत देश में स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ल्ड बैंक के साथ चल रहे प्रोजेक्ट्स में यह अध्ययन छह राज्यों—हिमाचल प्रदेश, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान—के कुछ जिलों में किया गया है।
स्कूलों को मैचमेकर बनाने की जरूरत
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को ऐसे स्कूलों की आवश्यकता है जो छात्रों को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार तैयार करें। इससे न केवल छात्रों को बेहतर रोज़गार मिलेगा, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति भी सुनिश्चित होगी।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों पर ध्यान
रिपोर्ट ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विशेषकर लड़कियों, पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई है। वर्ल्ड बैंक की मुख्य शिक्षा विशेषज्ञ शबनम सिन्हा ने कहा कि यदि लड़कियों को स्कूल में स्किल ट्रेनिंग दी जाए, तो उन्हें रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे। यह रोजगार उनके घर के पास उपलब्ध होंगे, जिससे वे बाद में बड़े अवसरों के लिए तैयार हो सकेंगी।
भारत की बड़ी ताकत: जनसंख्या और शिक्षा
वर्ल्ड बैंक के कंट्री डायरेक्टर अगस्तो कुआमी ने कहा कि भारत में क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसका समुचित उपयोग करना आवश्यक है। यदि भारत को 2047 तक विकसित देशों की श्रेणी में पहुंचना है, तो अगले 23 सालों तक 8% की वार्षिक विकास दर हासिल करनी होगी। इसके लिए देश की युवा जनसंख्या, जो सबसे बड़ी संपत्ति है, को सही दिशा में प्रशिक्षित करना होगा।
नई दिशा की ओर इशारा
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत को स्किल आधारित शिक्षा प्रणाली में निवेश करना होगा। यह केवल रोजगार सृजन ही नहीं करेगा, बल्कि भारत को विश्व का स्किल हब बनाने और एक मजबूत आर्थिक मॉडल तैयार करने में भी मदद करेगा।

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