Diwali Special: जाने कब है दिवाली का महापर्व, जाने शुभ तिथियाँ और मुहूर्त

Diwali Special: भारत में सभी प्रमुख त्‍योहारों में से एक दिवाली का त्‍योहार अब निकट आ रहा है। यह केवल एक दिन का त्‍योहार नहीं है, बल्कि इसे पूरे 5 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। इस पर्व के प्रति लोगों में इतना उत्‍साह होता है कि लोग महीने भर पहले ही अपने घरों को सजाने, साफ-सफाई करने और खरीदारी में जुट जाते हैं। दिवाली का सबसे बड़ा आकर्षण पारंपरिक रिवाजों को निभाने में है, जो इसे और भी विशेष बनाते हैं। इसीलिए हमने दिवाली के 5 दिन तक चलने वाले पर्व की महत्‍वपूर्ण तिथियाँ और शुभ मुहूर्त जाने।

 पुष्य नक्षत्र की महत्ता और शुभ मुहूर्त

 दिवाली की तैयारियां पुष्य नक्षत्र से शुरू होती हैं, जो इस बार 24 अक्टूबर को पड़ रहा है। पुष्य नक्षत्र सुबह 11:24 बजे से प्रारंभ होगा और पूरे दिन रहेगा। यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है क्योंकि इस दिन महालक्ष्मी, सर्वार्थसिद्धि, अमृतसिद्धि, पारिजात, बुधादित्य और पर्वत योग जैसे कई अद्भुत संयोग बन रहे हैं, जो कई वर्षों बाद इस प्रकार बन रहे हैं।


खरीदारी के लिए शुभ वस्त्र एवं मुहूर्त:

इस दिन सोना-चांदी, बर्तन, कपड़े, फर्नीचर, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक सामान, वाहन, और प्रॉपर्टी की खरीदारी करना अत्यंत शुभ माना गया है। शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

- सुबह 10:30 से 12:00 बजे तक

- दोपहर 12:00 से 2:45 बजे तक

- शाम 4:10 से 8:45 बजे तक


धनतेरस: लक्ष्मी का स्वागत

इस वर्ष 29 अक्टूबर, मंगलवार को धनतेरस का पर्व  मनाया जाएगा। 29 अक्टूबर को सुबह 10:45 बजे से त्रयोदशी तिथि का आरंभ  हो रहा है, जो 30 अक्टूबर दोपहर 12:49 बजे तक रहेगा। यह दिन माँ लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए विशेष है। शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

- सुबह 10:30 से 1:30 बजे तक

- दोपहर 2:30 से 4:00 बजे तक

- शाम 7:13 से 8:48 बजे तक


इसके अतिरिक्त श्री धन्वंतरि पूजन, बहीखाता पूजा, और अन्य शुभ कार्यों के लिए यह समय सबसे उत्तम माना गया है। शाम 7:13 से रात 8:48 तक श्री लक्ष्मी माता और कुबेर देवता का पूजन करें।


काली चौदस या नरक चौदस: बुराई पर विजय का प्रतीक

काली चौदस 30 अक्टूबर को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 30 अक्टूबर को दोपहर 12:49 बजे से होकर 31 अक्टूबर दोपहर 2:57 बजे तक रहेगा। इस दिन, रात 10:23 से 11:58 के बीच काली माता का पूजन करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस समय में हनुमान जी की पूजा भी की जाती है, जिसमें बजरंग बाण और सुंदरकांड का पाठ करने का विशेष महत्व है।


 दिवाली: रोशनी और महालक्ष्मी पूजन का पर्व

31 अक्टूबर को दिवाली का मुख्य पर्व है। अमावस्या तिथि का आरंभ 31 अक्टूबर को दोपहर 2:57 पर होकर 1 नवंबर शाम 4:58 पर समाप्त होगी। लक्ष्मी पूजन के लिए 31 अक्टूबर का दिन सबसे उपयुक्त है। शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

- वृश्चिक लग्न: दोपहर 1:43 से 3:15 बजे तक

- गोधूलि बेला: शाम 5:41 से 8:10 बजे तक

- वृषभ लग्न: शाम 6:30 से 8:28 बजे तक

- महानिशा काल: रात 11:41 से 12:30 बजे तक

- सिंह लग्न: रात 12:57 से 3:10 बजे तक


 गोवर्धन पूजा: प्रकृति की उपासना का दिन

गोवर्धन पूजा का पर्व दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है। इस बार परेवा 1 नवंबर को शाम 4:59 बजे लग रही है, जबकि इसकी उदया तिथि 2 नवंबर को है। गोवर्धन पूजा हमेशा उदया तिथि पर ही की जाती है, इसलिए इस वर्ष 2 नवंबर को इस पर्व को मनाया जाएगा। शुभ मुहूर्त:

- सुबह 7:44 से 9:23 बजे तक


भाई दूज: भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक

भाई दूज का पर्व 2 नवंबर को शाम 6:45 से आरंभ हो जाएगा, लेकिन भाई को तिलक करने के लिए 3 नवंबर का दिन सबसे उपयुक्त है। भाई को तिलक लगाने के लिए निम्नलिखित शुभ मुहूर्त हैं:

- सुबह 10:33 से 11:58 बजे तक

- दोपहर 1:23 से 2:46 बजे तक

- यम पूजन के लिए दोपहर 1:23 से 4:11 बजे तक का समय शुभ रहेगा

इस प्रकार दिवाली का यह महापर्व हर दिन के लिए विभिन्न अनुष्ठानों, पूजन विधियों और शुभ मुहूर्त के साथ आता है।

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