चांदीपुरा वायरस: बच्चों के लिए गंभीर खतरा, जानें लक्षण और बचाव
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चांदीपुरा वायरस:पिछले दो हफ्तों में गुजरात में चांदीपुरा वायरस के कारण करीब 16 बच्चों की मौत की आशंका है। यह बीमारी सैंड फ्लाई नामक मक्खी से फैलती है, जो कच्चे-पक्के मकानों की दरारों में रहती हैं। ये मक्खियां मिट्टी और गोबर से लीपे हुए मकानों में पाई जाती हैं। नमी इनके लिए अनुकूल माहौल होता है, जहां ये अंडे देती हैं और बड़े होकर मक्खी का रूप ले लेती हैं। ये मक्खियां इतनी छोटी होती हैं कि आँखों से दिखने वाली मक्खी के मुकाबले इनका आकार चार गुना कम होता है।
जून से अक्टूबर के बीच चांदीपुरा वायरस के सबसे ज्यादा मामले सामने आते हैं। डॉक्टर्स के अनुसार, जिन कमरों में हवा और सूरज की रोशनी नहीं आती, वहां ये मक्खियां ज्यादा पनपती हैं। यह संक्रामक रोग नहीं है, लेकिन इससे जान गंवाने वाले बच्चों की दर करीब 85 फीसदी है। आमतौर पर 14 साल तक के बच्चे ही इसकी चपेट में आते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
लक्षण
इस बीमारी के लक्षणों में बार-बार दस्त, उल्टी, जब्ती, नींद ना आना, बेहोशी और कुछ घंटों के बाद कोमा में जाना शामिल हैं। इसके अलावा, संक्रमित बच्चे की चमड़ी पर धब्बे भी पड़ जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस वायरस का फिलहाल कोई इलाज नहीं है, केवल लक्षणों का ही इलाज संभव है। अभी तक इसके लिए वैक्सीन भी नहीं बनी है।
बचाव के उपाय
- साफ-सफाई: घरों और आसपास के इलाके में साफ-सफाई रखें।
- कूड़ा-कचरा: कूड़ा-कचरा दूर रखें और दीवारों की दरारें ठीक करें।
- सूरज की रोशनी: कमरों में सूरज की रोशनी लाने का प्रबंध करें।
- मच्छरदानी: बच्चों को मच्छरदानी में सुलाएं।
- खेल: बच्चों को खुले में धूल में खेलने से रोकें।
- पानी जमा न होने दें: कहीं भी पानी जमा न होने दें और मच्छर-मक्खियों को पैदा होने से रोकें।
- चिकित्सा सलाह: अगर इनमें से कोई भी लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।
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